भूमिका
सनातन धर्म में माँ बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना गया है।
उन्हें शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों को स्तंभित करने वाली देवी कहा जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ बगलामुखी को यह शक्ति कैसे प्राप्त हुई?
माँ बगलामुखी का प्राकट्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय भयंकर संकट आया।
चारों ओर विनाश का वातावरण था।
तभी भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए देवी शक्ति का आह्वान किया।
✨ उसी क्षण पीत वर्ण की दिव्य शक्ति प्रकट हुई — और वही शक्ति माँ बगलामुखी के रूप में जानी गई।
स्तंभन शक्ति का अर्थ “स्तंभन” का मतलब है: रोक देना
स्थिर कर देना माँ बगलामुखी की कृपा से:
शत्रुओं की बुरी योजनाएँ विफल होती हैं झूठे आरोप रुक जाते हैं
नकारात्मक सोच शांत हो जाती है पीला रंग क्यों प्रिय है?
माँ बगलामुखी को पीला रंग प्रिय है क्योंकि:
यह ज्ञान और स्थिरता का प्रतीक है मन को शांत करता है
नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है पूजा में:पीले वस्त्रपीले फूल
पीली मिठाईअर्पित की जाती है।
माँ बगलामुखी की कृपा से लाभमाँ की भक्ति से: ✔️ भय दूर होता है
✔️ शत्रु बाधा नहीं बन पाते
✔️ आत्मविश्वास बढ़ता है
✔️ जीवन में स्थिरता आती है
माँ बगलामुखी की पूरी कथा यहाँ पढ़ें
https://www.santandharm.com/2026/01/blog-post.html
जो भक्त श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ
माँ बगलामुखी की आराधना करता है,
उसके जीवन में आने वाली नकारात्मक शक्तियाँ शांत हो जाती हैं।
🙏 जय माँ बगलामुखी

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