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Sawan Month 2023: इस साल रहेगा 2 महीने का सावन, जानिए तिथि, दुर्लभ संयोग और महत्व

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  Sawan Month 2023: इस साल रहेगा 2 महीने का सावन, जानिए तिथि, दुर्लभ संयोग और महत्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार साल 2023 में 12 महीने के बजाय 13 महीने का होगा। दरअसल इस बार अधिकमास के चलते है ऐसा होगा। अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर तीसरे साल एक अतिरिक्त माह प्रगट होता जिसे अधिकमास,मलमास और पुरुषोत्तम माह कहा जाता है। वैदिक कैलेंडर के अनुसार हर माह सूर्य का राशि परिवर्तन होता है जिसे सूर्य संक्रांति के नाम से जाना जाता है। लेकिन तीन साल के अंतराल पर एक माह संक्रांति नहीं है तब इस माह को अधिकमास के नाम से जाना जाता है।  साल 2023 में सावन का महीना अधिकमास के चलते साल 2023 में सावन का महीने में कुल 8 सावन सोमवार होंगे। ये सावन सोमवार इन तारीखों को पड़ेंगे- 10 जुलाई, 17 जुलाई, 24 जुलाई, 31 जुलाई, 7 अगस्त, 14 अगस्त, 21 अगस्त, और 28 अगस्त। सावन का महीना लंबा होने का कारण शिव भक्तों का अपने आराध्य देव भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। सावन का महीना और सावन सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को विशेष प्रिय होता है! अधिक मास में

सावन के महिने में जानें रुद्राभिषेक का महत्व, क्या है रुद्राभिषेक, कैसे करें रुद्राभिषेक, जानें पूजा की विधि, फायदे व नियम | Rudrabhishek kya hota hai? Rudrabhishek Kyon kiya jata hai?

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 सावन के महिने में जानें रुद्राभिषेक का महत्व, क्या है रुद्राभिषेक, कैसे करें रुद्राभिषेक, जानें पूजा की विधि, फायदे व नियम | Rudrabhishek kya hota hai? Rudrabhishek Kyon kiya jata hai? क्या है रुद्राभिषेक, रुद्राभिषेक क्या होता है? रुद्राभिषेक कब एवं क्यों किया जाता है? रुद्राभिषेक के नियम, विधि, सामग्री, फायदे (Rudrabhishek kya hota hai, kyon kiya jata hai, kab kiya jata hai, Rudrabhishek ke fayde) हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सावन के महीने को सर्वोत्तम माना जाता है। सावन के महीने में पूरे विधि विधान के साथ भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक किया जाता। सावन में रुद्राभिषेक को अधिक महत्व इसलिए भी दिया जाता है क्योंकि माना जाता है कि भगवान शिव इस महीने धरती पर अवतरित हुये थे। साल 2023 में सावन के महीने को बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इस साल सावन का महीना केवल 1 माह का नहीं बल्कि 2 माह का होगा। और माना जा रहा है कि ऐसा अद्भुत संयोग करीब 19 साल बाद बन रहा है। और भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम और शुभ समय सावन का महिना ही है। तो आइए जानते हैं रुद्राभिष

निर्जला एकादशी व्रत की कथा, इतिहास और महत्व, उपवास में ध्यान रखें ये बातें

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  निर्जला एकादशी व्रत की कथा, इतिहास और महत्व, उपवास में ध्यान रखें ये बातें निर्जला एकादशी आज, व्रत की कथा, इतिहास और महत्व, उपवास में ध्यान रखें ये बातें  निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है। ये व्रत मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के नज़रिए से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस एकादशी का व्रत करके श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान करने वालों को पूरे साल की एकादशियों का फल मिलता है। इस प्रकार जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।   एकादशी व्रत का इतिहास एक बार बहुभोजी भीमसेन ने व्यासजीके मुख से प्रत्येक एकादशी को निराहार रहने का नियम सुनकर विनम्र भाव से निवेदन किया कि ‘महाराज! मुझसे कोई व्रत नही किया जाता। दिन भर बड़ी तीव्र क्षुधा बनी ही रहती है। अतः आप कोई ऐसा उपाय बतला दीजिये जिसके प्रभाव से स्वत: सद्गति हो जाय।‘ तब व्यासजी ने कहा कि ‘तुमसे वर्षभर की

पशुपतिनाथ व्रत की विधि एवं कथा

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              पशुपतिनाथ व्रत की विधि  नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए  पशुपति व्रत | Pashupati Vrat ki Vidhi in Hindi  में प्रदान करने जा रहे हैं। दोस्तों आज हम इस लेख के माध्यम से आप सभी को पशुपति व्रत की संपूर्ण जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है या आप यह भी कह सकते हैं कि यह व्रत भगवान शिव से संबंधित है। भगवान शिव दीन दयालु है इस व्रत से आपके जीवन की सभी कठिनाई समाप्त हो जाएंगी और आपका जीवन आनंद में हो जाएगा। यह व्रत मुख्य रूप से 5 सोमवार किया जाता है इस व्रत का प्रारंभ सोमवार के दिन किया जाता है इस व्रत में आपको क्या क्या सावधानियां बरतनी है और इन उपायों को करके आप भगवान शिव को खुश कर सकते हैं यह सभी जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से मिल जाएगी। Pashupatinath Vrat | Pashupatinath Vrat Karne Ki Vidhi 1. इस व्रत को रखने का नियम यह है कि जिस सोमवार से यह व्रत रखना है उससे एक दिन पहले ब्रह्मचर्य का पालन करें। सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्मों के बाद यदि आपके घर के पास कोई पवित्र नदी बह रही हो तो जाकर उसमें स्ना