संदेश

जुलाई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावन में कर लीजिए ये उपाय, मानसिक रोग से और तनाव छू मंतर हो जाएगा

चित्र
  सावन में कर लीजिए ये उपाय, मानसिक रोग से और तनाव छू मंतर हो जाएगा Sawan 2023: मानसिक विकार रोग का एक ऐसा प्रकार है, जिसमें ना केवल रोगी व्यक्ति बल्कि पूरा परिवार एक ट्रौमा और डिप्रेशन में रहता है. ऐसे व्यक्ति की स्पेशल केयर लेनी पड़ती है. कभी-कभी तो ऐसा इंसान एक छोटे बच्चे की तरह बर्ताव करने लगता है. उसे छोटी से छोटी बात समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. कोई भी व्यक्ति जो मानसिक रोग से पीड़ित है, इस पवित्र मास में कौन से उपाय करें जिससे उसके कष्टों में कमी आए, आईये जानते है. 1. टेंशन-डिप्रेशन होने पर सोमवार और पूर्णिमा की रात्रि को चंद्र देव को देखकर ‘ऊँ सों सोमाय नम:’ मंत्र का जाप 108 बार जाप करें. साथ ही चावल, दूध, मिश्री, चंदन लकड़ी, चीनी, खीर, सफेद वस्त्र, चांदी आदि वस्तुओं का दान करने से लाभ मिलता है. 2. हर दिन अंगूठे और पहली उंगली यानी इंडैक्स फिंगर के पोरों को आपस में जोडने पर ज्ञान मुद्रा बनती है. इस मुद्रा को रोज दस मिनट करने से मस्तिष्क की दुर्बलता समाप्त हो जाती है. 3. किसी भी तरह की चिंताओं से मुक्ति पाने के लिए नित्य सुबह सूर्यदेव को तांबे के लौटे में जल, ल

2023 में पद्मिनी एकादशी कब है चलिए जानते है । पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त और कथा

चित्र
  2023 में पद्मिनी एकादशी कब है चलिए जानते है । पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त और कथा  एकादशी तिथि 28 जुलाई को दोपहर 02 :51 मिनट पर शुरू होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की  जो 29 जुलाई को दोपहर 01: 05 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार 29 जुलाई को ही पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. अधिक मास होने की वजह से इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत इस बार मलमास में रखा जाएगा. ये व्रत आप 29 जुलाई के दिन रख सकते है।  अधिक मास होने की वजह से इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत इस बार मलमास में रखा जाएगा. ये व्रत आप 29 जुलाई के दिन रख सकते हैं.  पद्मिनी एकादशी व्रत पारण  (Padmini Ekadashi Vrat Paran) पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण 30 जुलाई द्वादशी के दिन सुबह 5:41 मिनट से लेकर सुबह 8: 24 मिनट तक किया जा सकता है.  पद्मिनी एकादशी पूजा-विधि (Padmini Ekadashi Pooja Vidhi) पद्मिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें. सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल चढ़ाएं. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी मूर्ति स्थापित कर पूजा करें. फूल, धूप, दीप, अक्षत, चंदन आदि भगवान को चढ़ाएं

साढ़ेसाती और ढैय्या से शनि नहीं करेंगे परेशान! शनिवार को करें ये 5 काम, त

चित्र
  साढ़ेसाती और ढैय्या से शनि नहीं करेंगे परेशान! शनिवार को करें ये 5 काम,  शनिवार उपाय : शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है. ऐसे में आप इस दिन कुछ उपायों से शनि देव को प्रसन्न कर सकते है. इससे साढ़े साती और ढैय्या से शनि आपको परेशानी नहीं करेंगे. शनिवार के दिन जो व्यक्ति शनि देव की विधि-विधान से पूजा करता है, उससे शनि देव प्रसन्न रहते हैं और कभी दंड नहीं देते. साथ ही ऐसे लोगों की सभी इच्छाएं भी शनि देव पूरी करते हैं. लेकिन शनि देव अगर किसी से रुष्ट हो गए या जन्म राशि के आधार पर साढ़े साती या शनि की ढैय्या का प्रभाव हो तो ऐसे लोगों के जीवन में तमाम तरह की परेशानियां लगी रहती है. हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी-न-किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित होता है. इसी तरह शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है. शनि देव न्याय के देवता हैं. इसलिए इन्हें न्यायधीश और दंडाधिकारी कहा जाता है. क्योंकि शनि देव व्यक्ति को कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनिवार के दिन करें ये 5 उपाय, प्रसन्न होंगे शनि देव 1 . शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. इस दिन गरीब या जरूरतमंदो

2023 में नागपंचमी कब है ? जानें तिथि, मुहू्र्त और पूजा विधि

चित्र
  2023 में  नागपंचमी कब है ? जानें तिथि, मुहू्र्त और पूजा विधि नाग पंचमी श्रावण के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।इस बार नाग पंचमी 21 अगस्त 2023 को पड़ रही है। नाग पंचमी का त्योहार देशभर में बड़ी धूमधाम से माना जाता है। सावन मास में दो नागपंचमी तिथि आती है। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष। कृष्ण पक्ष यानी 7 जुलाई को जो नागपंचमी मनाई जाएगी वह सिर्फ राजस्थान, बिहार और झारखंड राज्यों में रहेगी। आइए जानते हैं नाग पंचमी की तिथि, मुहूर्त और महत्व के बारे में। नागपंचमी तिथि और मुहूर्त 21 अगस्त को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 20 अगस्त को रात 12: 23 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी। 21 तारीख को रात में 2: 01 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो जाएगी। नाग पंचमी के दिन कैसे पूजा करे क्या है व्रत के नियम मिलती है काल सर्प दोष से मुक्ति नागपंचमी के दिन व्रत रखें। व्रत रखने से व्यक्ति को कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन नाग देवताओं की पूजा के बाद नागपंचमी के मंत्रों का जजाप करें। कुंडली में राहु और केतु की दशा चल रही है उन्हें भी नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इस उपाय से राहु केतु दोष से मुक्ति मिलेगी।

रुद्राक्ष के लाभ भगवान शिव को प्रिय है रुद्राक्ष।चलिए जानते अलग अलग रुद्राक्ष धारण करने के लाभ

चित्र
  रुद्राक्ष के लाभ भगवान शिव को प्रिय है रुद्राक्ष।चलिए जानते अलग अलग रुद्राक्ष धारण करने के लाभ पौराणिक कथा के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु से हुई है। मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने से इंसान की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। जो इसे धारण कर भोलेनाथ की पूजा करता है उसे जीवन के अनंत सुखों की प्राप्ति होती है। रुद्राक्ष के हर एक मुख का अलग महत्व होता है, आइए जानते हैं। एकमुखी रुद्राक्ष एक मुखी इसे साक्षात शिव का स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से जीवन में किसी तरह की कमी नहीं रहती। एकमुखी रुद्राक्ष दुर्लभ माना जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को यश की प्राप्ति होती है।  दो मुखी रुद्राक्ष पुराणों में दोमुखी रूद्राक्ष को शिव-शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास और मन की शांति प्राप्त होती है एवं इसे धारण करने से कई तरह के पाप दूर होते हैं। तीन मुखी रुद्राक्ष इस रूद्राक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिगुणात्मक शक्तियां होतीं हैं। यह परम शांति, खुशहाली दिलाने वाला रुद्राक्ष है। इसे धारण करने से घर में सुख-संपत्ति, यश, सौभाग्य

मलमास शुरू है। आज से चलिए जानते हैं क्या काम वर्जित होता है मलमास में जानते है सम्पूर्ण जानकारी।

चित्र
  मलमास शुरू है। आज से चलिए जानते हैं क्या काम  वर्जित होता है मलमास में जानते है सम्पूर्ण जानकारी। आज से शुरू हो रहा है मलमास, जानें इस दौरान क्या करें और। आज से शुरू हो रहा है मलमास, जानें इस दौरान क्या करें और क्या नहीं Malmas 2023 Start Date End Date: इस बार सावन के महीने में मलमास पड़ रहा है, जिसकी शुरुआत आज यानी 18 जुलाई 2023 से हो रही है। इसका समापन 16 अगस्त 2023 को होगा। हिंदू धर्म में मलमास को बहुत खास माना जाता है। इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह विशेष महीना हर 3 साल में आता है। इस दौरान पूजा-पाठ का बहुत ज्यादा महत्व होता है। इस बार 19 साल बाद ऐसा संयोग बना है, जब मलमास सावन के महीने में आया है। इसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं और शिव जी को श्रावण मास का देवता कहा जाता है। ऐसे में इस बार मलमास में भगवान विष्णु के साथ शिव जी की भी  कृपा प्राप्त होगी। मलमास में पूजा-पाठ, जप-तप का बड़ा महत्व है, लेकिन इस दौरान कुछ कामों को वर्जित भी किया गया है। आइए जानते हैं मलमास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं...  मलमास

सावन 2023 में करे शिव चालीसा का पाठ मिटेगी सब पीड़ा बरसेगी भगवान शिव की कृपा।

चित्र
  सावन 2023 में करे शिव चालीसा का पाठ मिटेगी  सब पीड़ा बरसेगी भगवान शिव की कृपा। Sawan 2023: आज से श्रावण का पवित्र महीना शुरू हो गया है। सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना और जलाभिषेक करने से सभी तरह की मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं। इस बार का सावन बहुत ही खास रहने वाला होगा। सावन में करे शिव चालीसा का पाठ :जय गिरिजा पति दीन दयाला ।।दोहा।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात नकाऊ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि

सावन में ये 10 मंत्र दिलाएंगे भोलेनाथ का आशीर्वाद

चित्र
  सावन में ये 10 मंत्र दिलाएंगे भोलेनाथ का आशीर्वाद  सावन 2023: Sawan 2023: सावन महीने की शुरुआत मंगलवार 4 जुलाई 2023 से हो रही है और इसका समापन 31 अगस्त को होगा. इस बार सावन में अधिकमास लगा है, जिस कारण सावन दो महीने का होगा. इसमें अधिकमास की अवधि 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगी. सावन महीने में शिवजी की पूजा, जलाभिषेक के साथ ही सोमवारी व्रत का विशेष महत्व होता है. सावन में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने का विधान है. आमतौर पर सावन में सोमवारी व्रत की संख्या 4-5 होती है. लेकिन इस बार अधिकमास लगने के कारण सावन में कुल 8 सोमवार पड़ेंगे, जिसमें 4 सावन और 4 अधिकमास के होंगे.और अगर इन सभी सोमवार को आप सभी सावन महीना को बुद्धि, ज्ञानवृद्धि, ऐश्वर्य, धन, सुख-सौभाग्य की प्राप्ति और सर्वव्याधि नाश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस माह शिवलिंग पर दुग्ध या जल की निर्मल धारा से अभिषेक करते हुए इन मंत्रों का जाप करें. इन शक्तिशाली व चमत्कारी शिव मंत्रों के जाप से भाग्योदय होगा और शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी. सावन 2023: शिवजी के 10 मंत्र (Lord Shiva Mantra) Sawan 2023: शिवजी के प्रिय औ

सावन 2023 सपने में अगर दिखाई दे यह चीजें माना जाता है शुभ ! मिलता है शुभ फल

चित्र
  सावन 2023 सपने में अगर दिखाई दे यह चीजें माना जाता है शुभ ! मिलता है शुभ फल सावन महीने में सपने देखें: सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। 04 जुलाई से शुरू हुआ शिव जी का ये प्रिय महीना इस साल 31 अगस्त 2023 को समाप्त होगा। हिंदू धर्म में सावन के महीने को महादेव की पूजा करने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस पूरे माह में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। शिव जी को श्रावण मास का देवता कहा जाता है। मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव पार्वती के साथ पृथ्वी लोक पर विराजमान रहकर लोगों के दुख-दर्द को समझते है एवं उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं, इसलिए सावन का महीना खास होता है। वहीं धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिव जी जुड़ी कुछ चीजें हैं, जिनका सपने में दर्शन होना बेहद ही शुभ माना जाता है। यदि सावन सावन माह में भगवान शिव से जुड़ी ये चीजें किसी को सपने में दिखाई दे जाएं तो समझिए कि उसके ऊपर भगवान शिव की कृपा होने वाली है। चलिए जानते हैं कौन सी हैं वे चीजें... नंदी बैल शिव जी नंदी की सवारी करते हैं। नंदी महाराज के बिना शिव परिवार की पूजा अधूरी मानी जाती है। कहा जाता है कि यदि सावन के माह

2023 में सावन शिवरात्रि के दिन शनि प्रदोष बन रहा है दुर्लभ संयोग चलिए जानते हैं संपूर्ण जानकारी संपूर्ण

चित्र
  2023 में सावन शिवरात्रि के दिन शनि प्रदोष बन रहा है दुर्लभ संयोग चलिए जानते हैं संपूर्ण जानकारी संपूर्ण Sawan Shivratri 2023: सावन शिवरात्रि पर बना शनि प्रदोष का शुभ संयोग, जानिए तिथि और शनि दोष दूर करने के उपाय वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल सावन शिवरात्रि पर शनि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं तिथि और उपाय… Sawan shivratri 2023, shani pradosh vrat सावन शिवरात्रि पर बना दुर्लभ संयोग, शिव कृपा से कटेंगे शनि के दोष- (जनसत्ता) Sawan Shivratri 2023: शास्त्रों में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। इस तिथि को श्रावण तिथि भी कहा जाता है। आपको बता दें कि  इस दिन भोलेनाथ की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। पंचांग के अनुसार हर वर्ष सावन शिवरात्रि सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। वहीं आपको बता दें कि साल में 12 शिवरात्रि आती हैं लेकिन इनमें दो शिवरात्रि का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। जिसमें पहली फाल्गुन मास की शिवरात्रि, जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है और दूसरी सावन मास की शिवरात्रि। वहीं इस बार की सावन शिवरात्रि इसलिए खास है क्योंकि

सावन में कब है हरियाली अमावस्या? कैसे करनी है पूजा क्या है महत्व संपूर्ण जानकारी संपूर्ण

चित्र
  सावन में कब है हरियाली अमावस्या? कैसे करनी है पूजा क्या है महत्व संपूर्ण जानकारी संपूर्ण (Hariyali   Amavasya 2023 Date) हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन कृष्ण अमावस्या तिथि 16 जुलाई को रात 10 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी और 17 जुलाई  को सुबह 12 बजकर 01 मिनट पर इसका समापन होगा. ऐसे में उदयातिथि के चलते हरियाली अमावस्या का त्योहार 17 जुलाई दिन सोमवार को मनाया जाएगा. Hariyali Amavasya 2023 Date: सावन महीने की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या कहा जाता है। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। ऐसे में श्रावण माह की अमावस्या को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूर्वजों के निमित्त पिंडदान एवं दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। हरियाली अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके पितरों को पिंडदान, श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा हरियाली अमावस्या का पर्व जीवन में पर्यावरण के महत्व को भी बताता है। इस दिन नए पौधे लगाए जाते हैं। मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण करने से जीवन के सारे कष्ट दोष दूर हो जात

अगर आप भी पाना चाहते हैं कालसर्प दोष से मुक्ति तो दर्शन करके आएंगे त्रिंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के

चित्र
अगर आप। भी  पाना चाहते हैं कालसर्प दोष से मुक्ति तो दर्शन करके आएंगे त्रिंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के मा ना जाता है वहां पर तीनों देवों का वास है ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों वहां पर वास करते हैं शिवपुराण में वर्णन हैं कि गौतम ऋषि तथा गोदावरी और सभी देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने इस स्थान पर निवास करने निश्चय किया और त्र्यंबकेश्वर नाम से विख्यात हुए। श्रीत्र्यंबकेश्वर मंदिर भगवान शिव के उन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिन्हें भारत में सबसे अधिक पूजा जाता है। भगवान शिव का मंदिर नासिक जिले में स्थित है। मंदिर के पास ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से पुण्यसलिला गोदावरी नदी निकलती है। उत्तर भारत में पापनाशिनी गंगा का जो महत्व है, वही दक्षिण में गोदावरी का है। जिस तरह गंगा अवतरण का श्रेय महातपस्वी भागीरथ जी को है, वैसे ही गोदावरी का प्रवाह ऋषिश्रेष्ठ गौतम जी की महान तपस्या का फल है, जो उन्हें भगवान आशुतोष से प्राप्त हुआ था। शिवपुराण में वर्णन हैं कि गौतम ऋषि तथा गोदावरी और सभी देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने इस स्थान पर निवास करने निश्चय किया और त्र्यंबकेश्वर नाम से विख्यात हुए। त्रिदेव रहत

आईआरसीटीसी लाया है शानदार टूर पैकेज Jyotirlinga Darshan In Sawan: सावन में करें सात ज्योतिर्लिंगों के दर्शन,

चित्र
  आईआरसीटीसी लाया है शानदार टूर पैकेज Jyotirlinga Darshan In Sawan: सावन में करें सात ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, Jyotirlinga Darshan In Sawan 2023: भारत में 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिनका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। सावन में अगर आप भी भगवान शिव के अद्भुत और प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा रखते हैं तो आईआरसीटीसी आपके लिए एक शानदार टूर पैकेज लेकर आया है। सावन शुरु हो गए हैं। भगवान शिव के प्रिय माह सावन का हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विशेष महत्व है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। वहीं शिव पूजन के लिए शिवालयों, मंदिरों और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए जाते हैं। आईआरसीटीसी के ज्योतिर्लिंग यात्रा टूर पैकेज के अंतर्गत यात्रियों को एक साथ 7 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का मौका मिल रहा है। टूर पैकेज के अंतर्गत भीमाशंकर, ग्रिनेश्वर, महाकालेश्वर, मल्लिकार्जुन, ओंकारेश्वर, परली वैजनाथ, त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का मौका मिलेगा। सावन के पावन माह में सातों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए इस टूर पैकेज को बुक कर सकते हैं।   टूर पैक

2023, जानें मंगला गौरी व्रत की विधि और लाभ और व्रत की कथा

चित्र
  2023, जानें मंगला गौरी  व्रत की विधि और लाभ और व्रत की कथा Mangla Gauri Vrat 2023: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई को रखा गया है । मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत रखने से व्यक्ति की कई इच्छाएं पूरी होती है।   क्या है मंगला गौरी व्रत मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। अगर कोई संतान प्राप्ति की इच्छा से भी इस व्रत को रखता है तो उसकी मनोकामना जल्द पूरी हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही अगर किसी के दांपत्य जीवन में समस्या चल रही है तो उनके लिए भी यह व्रत बहुत मंगलकारी रहता है। वहीं, अगर कोई अविवाहित कन्या इस व्रत को रखती है तो उन्हें उत्तम वर प्राप्ति की मनोकामना जल्द पूरी हो जाती है। मंगला गौरी व्रत पूजा विधान 1. मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। 2. इसके बाद अपने घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें और मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा समर्पित करें। इसके बाद मां पार्वती को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें। 3. फिर आटे का दीपक बनाकर दिया

Sawan 2023: 2 दिन बाद से प्रारंभ हो रहे सावन सोमवार सावन में कैसे करे संकट सोमवार व्रत,16 सोमवार व्रत विधि,ऐवम सोलह सोमवार व्रत कथा,

चित्र
  Sawan 2023: 2 दिन बाद से प्रारंभ हो रहे सावन सोमवार सावन में कैसे करे संकट सोमवार व्रत,16 सोमवार व्रत विधि,ऐवम सोलह सोमवार व्रत कथा, इस माह में सोमवार के व्रत रख भोलेनाथ को प्रसन्न किया जाता है। इस दौरान कई लोग सावन से शुरू करते हुए सोलह सोमवार के व्रत भी रखते हैं। इस साल अधिक मास होने के कारण सावन का महीना दो माह का होगा। इसलिए इस साल सावन 4 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसका समापन 31 अगस्त के दिन होगा 16 सोमवार व्रत कब और कैसे शुरू करें 16 सोमवार व्रत कब और कैसे शुरू करें |. पालक, संहारक तथा अर्धनारीश्वर रूप में स्थित शिवजी शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले देव हैं यही कारण है की इन्हे प्रसन्न करने के लिए भक्त विभिन्न रूप में आराधना करते है। भगवान् शिव की इन व्रत आराधनाओं में कुछ अत्यंत ही सरल होती हैं तो कुछ बहुत ही कठिन होता हैं। इन्ही व्रत में 16 सोमवार व्रत भी है जो बहुत ही कठिन है किन्तु इस व्रत  को करने से  भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते है। भगवान शंकर को महादेव कहा जाता है। यह व्रत कोई भी कर सकता है। यह व्रत यदि कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाए तो उन्हें मन