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मां लक्ष्मी करेंगी वास अगर गरुड़ पुराण के अनुसार प्रतिदिन रसोई में होगे ये काम

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  मां लक्ष्मी करेंगी वास अगर  गरुड़ पुराण के अनुसार प्रतिदिन रसोई में होगे ये काम Garuda Purana Lord Vishnu Niti in Hindi: मां लक्ष्मी का वास जिस घर पर होता है, वहां धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है. ऐसे में सुखी और सपंन्न जीवन के लिए मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना बेहद जरूरी है. गरुड़ पुराण में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई उपायों के बारे में बताया गया है. Garuda Purana : गरुड़ पुराण में रसोई से जुड़े ऐसे कामों के बारे में बताया गया है, जिसे प्रतिदिन करने से घर मां लक्ष्मी का वास होता है. अगर आप भी लक्ष्मी जी की कृपा चाहते हैं तो इन कामों को जरूर करें. गरुड़ पुराण में रसोईघर से जुड़ी ऐसी बातें बताई गई हैं, जिसका पालन करने पर घर सुख-संपन्नता से भरा रहता है और कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती. साथ ही ऐसे घर पर मां लक्ष्मी का वास होता है. रसोई हमारे घर का अहम हिस्सा माना जाता है. यहां परिवार वालों के लिए भोजन तैयार होता है और साथ ही रसोई में देवी अन्नपूर्णा वास करती हैं. लेकिन रसोई  से जुड़ी जाने-अनजाने में की गई गलतियां भी आपको भारी पड़ सकती है और ये आपको दरिद्र बना सकती हैं. इसलिए

रक्षाबंधन 2023 भद्रा के कारण इस बार रक्षाबंधन 30 अगस्त को मनाना शुभ या 31 को? जानें सही तिथि और मुहूर्त

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  रक्षाबंधन 2023 भद्रा के कारण  इस बार रक्षाबंधन 30 अगस्त को मनाना शुभ या 31 को? जानें सही तिथि और मुहूर्त Raksha Bandhan 2023 Date: इस वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया रहने के कारण राखी 30 और 31 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी। Raksha Bandhan 2023: सनातन धर्म में हर वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन पंचक और भद्रा काल का निर्माण हो रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि रक्षाबंधन पर्व 30 अगस्त या 31 अगस्त के दिन मनाया जाएगा ? आइए जानते हैं रक्षाबंधन पर्व की सही तिथि और शुभ मुहूर्त। रक्षाबंधन 2023 तिथि पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 31 अगस्त सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर होगा। इस दिन भद्रा काल का निर्माण हो रहा है जो भद्रा रात्रि 09 बजकर 01 मिनट तक रहे

2023 पुत्रदा एकादशी कब है ?, जानें सही डेट, पूजा विधि, सामग्री, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और पूरी डिटेल्स

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  2023  पुत्रदा एकादशी कब है ?, जानें सही डेट, पूजा विधि, सामग्री, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और पूरी डिटेल्स Putrada Ekadashi 2023 : इस समय सावन का पावन महीना चल रहा है। सावन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। एकादशी का पावन दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना की जाती है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी डेट, पूजा विधि, महत्व और सामग्री की पूरी लिस्ट.. सावन पुत्रदा एकादशी 2023 डेट (Sawan Putrada Ekadashi 2022 Date) सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 27 अगस्त 2023 को रखा जाएगा. ये व्रत रक्षाबंधन से चार दिन पहले रखा जाता है. जिन दम्पत्तियों को कोई पुत्र नहीं होता उनके लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत अत्यधिक महत्वपूर्ण है. सावन पुत्रदा एकादशी 2023 मुहूर्त (Sawan Putrada Ekadashi 202

अघोरी कहां और कैसे करते हैं साधना, कैसा होता है इनका स्वभाव, जानें इनके बारे में सबकुछ

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  अघोरी कहां और कैसे करते हैं साधना, कैसा होता है इनका स्वभाव, जानें इनके बारे में सबकुछ Aghori Koun Hote hain : अघोरी नाम सुनते ही सभी के मन में एक ऐसी तस्वीर उभर कर आती है, जिसकी लंबी-लंबी जटाएं हों, जिसका शरीर राख में लिपटा हो और जिन्होंने मुंड मालाएं गले में धारण की हों. माथे पर चंदन का लेप और उसके ऊपर उभरा हुआ तिलक. यह डरावना स्वरूप हर किसी के मन में भय पैदा कर सकता है परंतु इनके नाम का अर्थ विपरीत होता है. अघोरी नाम का अर्थ होता है, एक ऐसा व्यक्ति जो सरल है, डरावना नहीं है, जो किसी से भेदभाव नहीं करता. यह अक्सर आपको श्मशान के सन्नाटे में जाकर तंत्र क्रिया करते हुए देखे जा सकते हैं एक बाबा को अघोरी का दर्जा तभी दिया जाता है, जब वह मन से प्रेम, नफरत, बदला, जलन आदि सभी तरह के भाव से मुक्त हो जाए. कई लोग अघोरी बाबाओं को डरावना समझते हैं, लेकिन वास्तव में अघोरी बाबा डरावने नहीं होते हैं, बल्कि इनकी वेशभूषा डरावनी होती है. साथ ही ये बहुत ही सरल होते हैं और किसी भी चीज में भेदभाव नहीं करते हैं. कहा जाता है कि अघोरी बाबा लोगों या दुनिया की किसी भी चीज में कोई रुचि नहीं रखते हैं. इनकी

बजरंग बाण का पाठ रोजाना करें विवाह में आ रही बाधाएं होंगी दूर

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  बजरंग बाण का पाठ रोजाना करें विवाह में आ रही बाधाएं होंगी दूर Bajrang Baan हनुमान जी को भगवान राम के परम भक्त के रूप में जाना जाता है। संकटमोचन हनुमान साहस चरित्र भक्ति और सदाचार के आदर्श प्रतीक हैं। रोजाना श्री बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति को कुंडली में ग्रह दोष से छुटकारा मिलता है। साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।   संपूर्ण बजरंग बाण दोहा "निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।" "तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥" चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।। जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।। जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।। आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।। बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।। अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।। लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।। अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।। जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।

भगवान शिव शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं । क्या है पौराणिक कथा चलिए जानते है

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  भगवान शिव शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं । क्या है पौराणिक कथा चलिए जानते है  शिव भक्तों के लिए शिवजी का हर एक रूप निराला है। कहते हैं भगवान शिव भोले हैं, क्योंकि वे अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले हैं। वे अपने भक्तों के समक्ष स्वयं प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं एवं मन मुताबिक वरदान देते हैं। हिन्दू धर्म में शिव उपासना का विशेष महत्व है, कहते हैं किसी भी प्रकार की समस्या क्यों ना हो, शिवजी की मदद से सभी संकट दूर हो जाते हैं। शिवजी का जप करने से भक्त खुद में एक शक्ति को महसूस करता है। शायद इसी विश्वास के कारण भगवान शिव अपने भक्तों के बीच हर रूप में प्रसिद्ध हैं।फिर वह भोले बाबा का रूप हो या फिर शिव का रौद्र रूप। उनके भक्त शिव के हर रूप के सामने सिर झुकाकर उन्हें नमन करते हैं। कुछ समय पहले हमने एक ब्लॉग लिखा था, जिसमें यह प्रश्न उठाया गया था कि शिव भांग एवं धतूरे का सेवन क्यों करते हैं। शिव की जटाओं से गंगा क्यों बहती है? शिवजी गले में सर्प धारण क्यों करते हैं? इसी तरह से कई ऐसे सवाल हैं जो खुद में एक रहस्य हैं। यूं तो शिव के हर रूप के पीछे कोई ना कोई रहस्य छिपा है, लेकिन

कब है अधिकमास अमावस्या? 15 या 16 अगस्त कब है अधिकमास अमावस्या? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

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  कब है अधिकमास अमावस्या? 15 या 16 अगस्त कब है अधिकमास अमावस्या? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि Adhik Maas Amavasya 202 3: मान्यताओं के अनुसार, कई लोग अमावस्या को अमावस भी कहते हैं. इस बार अधिकमास की अमावस्या 16 अगस्त को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पूजा-पाठ करने का खास महत्व होता है. अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए पूजा पाठ और श्राद्ध कर्म करवाना बेहद फलदायी माना जाता है. अधिकमास अमावस्या शुभ मुहूर्त (Adhik Maas Amavasya 2023 Shubh Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तिथि को अमावस्या का त्योहार मनाया जाता है. इस बार अधिकमास की अमावस्या तिथि 15 अगस्त को दिन में 12 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 16 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर होगा. साथ ही इस दिन वरीयान योग का निर्माण भी होने जा रहा है जिसका समय 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 33 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 16 अगस्त को शाम 6 बजकर 31 मिनट पर होगा. Adhik Maas Amavasya 2023 : पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास की अमावस्या पितृ शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. शास्त

केसर के तिलक : से सोई किस्मत जाग जाती है चलिए जानते हैं कैसे?।

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  केसर के तिलक : से सोई किस्मत जाग जाती है चलिए जानते हैं कैसे? अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति के लिए लगाएं तिलक, जानें केसर के तिलक का महत्व दरअसर हिंदू संस्कृति व शास्त्रों में तिलक को मंगल व शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जब भी कोई व्यक्ति शुभ काम के लिए जाता है तो उसके मस्तक पर तिलक लगाकर उसे विदा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं तिलक आपकी कई मनोरामनाएं भी पूरी करता है। तिलक का मुख्य स्थान मस्तक होता है, क्योंकि इस स्थान पर सात चक्रों में से एक आज्ञा चक्र होता है। शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन तिलक लगाने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति को ज्ञान, समय से परे देखने की शक्ति , आकर्षण प्रभाव और उर्जा प्रदान करता है। इस स्थान पर अलग-अलग पदार्थों के तिलक लगाने का अलग-अलग महत्व है। इनमें सबसे अधिक चमत्कारी और तेज प्रभाव दिखाने वाला पदार्थ केसर है। केसर का तिलक करने से कई कामनाओं की पूर्ति की जा सकती है। बृहस्पति ग्रह दोष से मुक्ति के लिए जीवन में सभी मंगल कार्य होते रहे इसके लिए बृहस्पति का उच्च स्थिति में होना बेहद जरूरी है.क्योंकि बृहस्पति अथवा गुरु ग्रह को मांगलिक कार्

वरलक्ष्मी व्रत,जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त मिलता अखंड सौभाग्य चलिए जानते हैं संपूर्ण जानकारी

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  वरलक्ष्मी व्रत , जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त मिलता अखंड सौभाग्य चलिए जान ते हैं संपूर्ण जानकारी वरलक्ष्मी व्रत 2023:  सावन महीने में आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी का व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 25 अगस्त 2023 को है। वरलक्ष्मी व्रत धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत सभी के लिए वरदान प्राप्त करने वाला माना गया है। इस व्रत और पूजन से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्यक्ति को धन-संपत्ति, वैभव, संतान, सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों में मनाया जाता है। वरलक्ष्मी व्रत के दिन महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार की मंगल कामना के लिए दिनभर उपवास रहकर मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में... वरलक्ष्मी व्रत 2023 पूजा मुहूर्त यदि देवी वरलक्ष्मी की पूजा निश्चित लग्न के दौरान की जाए तो यह लंबे समय तक चलने वाली समृद्धि प्रदान करती है। 25 अगस्त को वरलक्ष्मी व्रत वाले दिन पूजा के लिए चार शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इनमे से कोई भी उपय

2023 मलमास: लक्ष्मी मां की कृपा पाना चाहते है तो मलमास खत्म होने से पहले कर ले ये काम । मलमास में क्या करना चाहिए।

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  2023 मलमास: लक्ष्मी मां की कृपा पाना चाहते है तो मलमास खत्म होने से पहले कर ले ये काम ।   मलमास में क्या करना चाहिए।

शिव महापुराण में से बताए गए प्रदीप जी मिश्रा जी के अदभुत उपाय

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   शिव महापुराण में  से बताए गए  प्रदीप जी मिश्रा जी के अदभुत उपाय                      नमः शिवाय:                 श्री शिवाय नमस्तुभ्यं पंडित श्री प्रदीप मिश्रा जी (सीहोरे वाले) द्वारा श्री शिव महापुराण की कथा में बताये कुछ अचूक उपाय लिखित रूप में संतान प्राप्ति के लिए  अगर किसी के यहां संतान नहीं हो रही है, और बहुत साल निकल गए तो इस सफेद आक के उपाय तो जरूर करके देखे। सफेद आक के जड़ को पति पत्नी लेकर आए। नारी के पीरियड्स के सातवें दिन शिव मंदिर जा कर शिवलिंग के ऊपर से उस जड़ को तुमरूका जी का नाम लेकर 21 बार घुमा लिजिये। फिर शिव मंदिर में ही जहां नंदी महाराज का स्थान होता है वहा नंदी के पीछे खड़े हो कर शिवलिंग के दर्शन करते करते आक के जड़ को लाल धागे से नारी को अपने कमर में बांध लेना है तमरूका जी का नाम लेकर। इसके साथ ही, एक पीपल का पत्ता शिवजी को कुंदकेश्वर महादेव के नाम से समर्पित करके घर ले आए और उसे गाय के दूध में उबाल कर  दोनो पति पत्नी को रात में सोने से पहले पी लेना है। रोज़ मंदिर जा कर एक पत्ता समर्पित करना है और घर लेआकर उसका पान करना है। पीपल की पत्ती जब ठंडी हो जाए तो आप कहीं

लक्ष्मी जी की कृपा चाहिए तो घर में रखिए दक्षिणावर्ती शंख।

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  लक्ष्मी जी की कृपा चाहिए तो घर में रखिए दक्षिणावर्ती शंख। दक्षिणावर्ती शंख ।:  हिंदू धर्म में वाद्य यंत्रों का खास महत्व है. इनमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है. इन वाद्य यंत्रों शंख से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताए हैं. शंख को घर के पूजा घर में रखना बहुत शुभ माना जाता है. पूजा के समय शंख बजाने पूरे घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है. विष्‍णु पुराण के अनुसार शंख में देवी लक्ष्‍मी का वास होता है. शंख के कई प्रकार होते हैं. हिंदू धर्म में कई अलग-अलग तरह के शंखों को महत्‍व दिया गया है. इन सब में दक्षिणावर्ती शंख का विशेष महत्व होता है. आइए जानते हैं इस शंख को घर में रखने से क्या फायदे होते हैं और इसे घर में क्यों रखना चाहिए. दक्षिणावर्ती शंख का महत्व सभी शंखों में दक्षिणावर्ती शंख का विशेष महत्व है. एक तरफ जहां सभी शंखों का पेट बाईं ओर खुलता है वहीं इस शंख का पेट दाईं ओर खुलता है. यह शंख दिव्‍य माना गया है. मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से लक्ष्मी माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है. शास्त्रों और वेद-पुराणों में दक्षिणावर्ती शंख को महत्वपूर्ण माना गया है. पौराणिक कथा के अनुसार इ

शिव पुराण के इन उपाय का प्रयोग करने से 4 गम्भीर समस्याओं से मुक्ति मिलेगी

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  शिव पुराण के इन उपाय का प्रयोग करने से 4 गम्भीर समस्याओं से मुक्ति मिलेगी शिव पुराण में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही इसमें यह भी बताया गया है कि भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को किसी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। साथ ही उनके जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है। मान्यता यह भी है कि हर दिन भगवान शिव की उपासना करने से व्यक्ति को धन, ऐश्वर्य, कर्ज से मुक्ति इत्यादि का आशीर्वाद मिलता है। बता दें कि शिव पुराण में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिनका पालन करने से भक्तों को न केवल लाभ मिलता है, बल्कि 4 गम्भीर समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं- जीवन में सभी समस्याओं को दूर करने के लिए  शिव पुराण में बताया गया है कि जीवन में विभिन्न प्रकार के समस्याओं को दूर करने के लिए हर दिन शिवलिंग पर जल में काला तिल मिलाकर अभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि इस उपाय को करने से जीवन में आ रही अशुभता कम हो जाती है सभी कार्य सफल होने लगते हैं।  सुख-समृद्धि में आ रहे समस्याओं को दूर करने के लिए शिव पुराण में बताया गया है कि जो लोग सुख-सुविधाओं में वृद्धि की

विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत 2023, 5 अगस्त जानिए संपूर्ण जानकारी

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  विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत 2023, 5 अगस्त जानिए संपूर्ण जानकारी अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्ती को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. ये व्रत 3 साल में एक बार आता है. जानते हैं डेट, मुहूर्त और महत्व. Adhik Maas, Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2023: अधिकमास का कृष्ण पक्ष 2 अगस्त 2023 से शुरू हो रहा है. अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्ती को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. ये व्रत 3 साल में एक बार आता है. यही वजह है कि अधिकमास में गणपति की पूजा का खास महत्व है. मान्यता है इस व्रत के प्रताप से सालभर की संकष्टी चतुर्थी व्रत का फल मिलता है, साधन को आरोग्य, धन, समृद्धि प्राप्त होती है. आइए जानते हैं अधिकमास की विभुवन संकष्टी चतुर्थी की डेट, मुहूर्त और महत्व. विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2023 मुहूर्त पंचांग के अनुसार, श्रावण अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 4 अगस्त 2023को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 05 अगस्त 2023 को सुबह 09 बजकर 39 मिनट पर होगा. संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा की पूजा का मुहूर्त 4 अगस्त को रहेगा. गणपति पूजा सुबह का मुहूर्त - सुबह 07

भस्म भगवान शिव को क्यों प्रिय है ? जानिए महत्व और शिवजी पर अर्पित करने के फायदे

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  भस्म भगवान शिव को क्यों प्रिय है ? जानिए महत्व और शिवजी पर अर्पित करने के फायदे भस्म का महत्व शिव पुराण के अनुसार भस्म धारण करने मात्र से ही सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। भस्म को शिवजी का ही स्वरूप माना गया है जो मनुष्य पवित्रता पूर्वक भस्म धारण करता है और शिवजी का गुणगान करता है उसे शिवलोक में आनंद मिलता है। शिव पुराण में नारदजी को भस्म की महिमा बताते हुए ब्रह्माजी कहते हैं कि यह सभी प्रकार के शुभ फल देने वाली है और जो मनुष्य इसे अपने शरीर पर लगाता है उसके सभी दुख व शोक नष्ट हो जाते हैं। भस्म शारीरिक और आत्मिक बल को बढ़ाकर मृत्यु के समय भी अत्यंत आनंद प्रदान करती है। शिव पुराण   के अनुसार भस्म धारण करने मात्र से ही सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। भस्म को शिवजी का ही स्वरूप माना गया है जो मनुष्य पवित्रता पूर्वक भस्म धारण करता है। सनातन धर्म में भगवान शिव को अविनाशी बताया गया है। शिवजी का न आदि है, न अंत है। देवों के देव महादेव सच्चे मन से की गई थोड़ी सी पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। भोलेनाथ का रहन-सहन, आवास और गण अन्य देवताओं से भिन्न है। शास्त्रों के अनुसार श